Maharashtra State: महाराष्ट्र राज्य के मुख्य खेल और इतिहास

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महाराष्ट्र राज्य:

भारत का महाराष्ट्र(Maharashtra) राज्य सबसे बड़ा राज्य है वही शासन जिनका हुआ वह नए तरह के खेल लाना सुरु किये अथवा ब्रिटिश शासन के बाद बहुत सरे महत्वपूर्ण खेलो को पीछे छोड़ के नए खेल क्लब, जिम खाने और कई प्रकार के सभ्यता सुरु हुई जिन्होंने अधिक महत्वता दी जाने लगी (Maharashtra) राज्य भारत का सबसे अमीर और शक्तिशाली राज्य है जिसे वर्तमान में फिल्मो की दुनिया वाला नगर बोला जाता है इसी के साथ इस सिटी से बहुत अच्छे और प्रसंसा जनक खिलाड़ी और फिल्म स्टार उभर कर सामने आये इसलिए महाराष्ट्र राज्य सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली राज्य कहलाता है।

महाराष्ट्र राज्य

महाराष्ट्रीयन संस्कृति में खेल को मुख्य रूप से अनिवार्य हिस्सा माना गया हैं। बहुत अच्छी तरह से तभी तरह के नियम के तहत खेला जाता है, महाराष्ट्र (Maharashtra) में खेले जाने वाले सबसे मुख्य खेल यह है, क्रिकेट को सबसे लोकप्रिय खेल माना जाता है, लेकिन हॉकी, खो खो, बैडमिंटन, कबड्डी और टेबल टेनिस भी व्यापक रूप से खेले जाते हैं। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में, कुश्ती चैंपियनशिप जैसे हिंद केसरी और (Maharashtra) केसरी नियमित रूप से होती हैं। राज्य में युवाओं के बीच पकाडा-पकड़ी (टैग) जैसे खेल भी लोकप्रिय हैं। महाराष्ट्र स्टेट में यह सबसे मुख्य खेल है जिसे सभी नियमो के स्वरुप में खेला जाता है।

यह राज्य हॉकी, टेनिस और बैडमिंटन, शतरंज के लिए विभिन्न घरेलू स्तर की फ्रैंचाइज़ी-आधारित लीगों का घर है, (Maharashtra) ने कई लोकप्रिय एथलीटों का उत्पादन किया है, जैसे कि क्रिकेटर्स सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर। यह महाराष्ट्र राज्य की बहुत बड़ी हस्ती और बहुत अच्छा खेल खेलने वाले कहे जाते है भविस्य में यैसे बहुत से नाम सामने आएंगे जो मुख्य रूप से इसी राज्य के होंगे इसलिए यहाँ खेल को महत्वपूर्ण माना गया है आप महाराष्ट्र (Maharashtra) राज्य के सभी खेलो के बारे में जानिये।

(Maharashtra) इतिहास:

(Maharashtra) पूर्व-औपनिवेशिक खेल:

भारत में सबसे पहले प्राचीन काल में खेल मार्शल आर्ट परंपरा पहलवानी का अभ्यास किया जाता था। यह खेल २ आदमी जिन्हे यह खेल खेलने के लिए अखाड़े में आना [पड़ता था और किसी एक को जमीन में गिरना पड़ता था यह खेल मार्शल आर्ट का अभ्यास अखाड़ों या तालीम नामक मिट्टी के खड्डों में किया जाता था, यह खेल इतना प्रसिद्द था की भारत के हर राज्य में खेला जाता था जीतने पर इनाम दिया जाता था यह महाराष्ट्र राज्य का महत्वपूर्ण खेल है जिसे यैसे लोग खेलते थे जो शक्तिशाली और शरीर से काफी मजबूत होते थे क्योकि इसे खेलने के लिए दोनों तरफ से शक्तिशाली व्यक्ति होना चाहिए।

19 वीं शताब्दी की शुरुआत में मराठा साम्राज्य के पेशवा बाजी राव द्वितीय, ताकत और कुश्ती प्रतियोगिताओं के संरक्षक थे। उनके संरक्षण में, पोलम्ब जिम्नास्टिक्स (मलखम्ब कहलाता है) का खेल पुणे में बालंभत देवधर द्वारा विकसित किया गया था। उन्होंने मलखंभ और मल्लविद्या को अन्य मराठी शासित राज्यों जैसे बड़ौदा और ग्वालियर में लाया। महाराष्ट्र के इन शासकों में, तलवारबाजी, घुड़सवारी, कुश्ती, तीरंदाजी और निशानेबाजी ने लोकप्रियता हासिल की।

​​19वी शताब्दी में जब यह खेल की शुरुआत की वही खेल को समझने में समय लगा खेल को खेलने के लिए एक बड़े से खम्बे में अपने पैरो की मदत से ऊपर चढ़ कर खेलना अथवा अपना सबसे अच्छा प्रदर्सन करना पड़ता था वही यह खेल अधिक प्रसिद्द होने के कारण भारत के हर राज्य के रजवाड़ो में होने लगा सभी राज्य के राजाओ ने अपने महल के अंदर ही यह खेल खेलने के लिए बड़े स्तम्ब लगवा दिए वही यह खेल महाराष्ट्र राज्य का लोग प्रिय खेल बन गया।

ब्रिटिश शासन के तहत आयातित खेल:

भारत मे ब्रिटिश शासन होने के बाद महाराष्ट्र राज्य में बहुत सारे खेलो के बदल दिया गया और शासन के तहत नए खेल लाये गए 1860 में मुला-मुथा नदी पर मनोरंजक नौका विहार की अनुमति दी थी। इसके बाद शासन ने कुछ और खेलो को अनुमति दी जैसे की रेस कोर्स और घुड़ सवारी जैसे खेल को खेला जाने लगा इन खेलो को महाराष्ट्र राज्य में मुख्य रूप से खेला जाने लगा।

राज्य में लगभग 19 वीं शताब्दी के अंत तक, अंग्रेजों ने कई खेल क्लबों का निर्माण किया था जो काफी अच्छा था। वही जिमखाने खोले गए महत्वपूर्ण खेलो को साथ लेके नए खेलो उत्पत्ति हुई जहा सभी राज्य के मुकाबले महाराष्ट्र राज्य सबसे शक्तिशाली और सबसे बड़ा राज्य माना जाता है यहाँ सभी खेलो को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है लेकिन ब्रिटिश साम्राज्य के आने के बाद बहुत बदलाव हो गए जहा पुराने खेलो को महत्वा न देकर नए खेल प्रारम्भ किये गए और सभी खेल खेलने जाने लगे।

स्वदेशी खेल:

राज्य में कई भारतीय खेलों की शुरुआत हुई या उन्हें औपचारिक रूप दिया गया। इनमें बैडमिंटन, कबड्डी, लंगड़ी और मल्लखंबा शामिल हैं। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में, कुस्ती (भारतीय मिट्टी की कुश्ती) और बैलगाड़ी की प्रतियोगिताओं को नियमित रूप से वार्षिक जात्रा कार्निवल के दौरान देखा जा सकता है। राज्य में कुस्ती की प्रतियोगिता करवाई जाती थी जहा दूर दूर से लोग भाग लेने आया करते थे यह राज्य में बहुत सारे खेलो को सुरु किया जहा वही खेल सभी बड़े राज्यों में खेले जाने लगे।

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